Title: बीती रात का सपना
Category: Other
Blog Entry: बीती रात का सपना बीती रात का सपना, छिपा ही रह जाये,तो वो, सपना, सपना नहीं रहता है!पायलिया के घूँघरू, ना बाजें तो, फिर,पायल पायल कहाँ रहती है?बिन पंखों की उडान आखिरी हद तक,साँस रोक कर देखे वो दिवा- स्वप्न भी,पल भर में लगाये पाँख, पँखेरु से उड,ना जाने कब, ओझल हो जाते हैँ !मन का क्या है ? सारा आकाश कम हैभावों का उठना, हर लहर लहर पर,शशि की तम पर पडती, आभा है !
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